राजस्थान शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। इस बार कागजी कार्रवाई को पीछे छोड़ते हुए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। शिक्षा विभाग 25 मार्च से प्रवेशोत्सव का सघन अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसमें इस बार सभी डेटा डिजिटल रूप से ‘प्रवेशोत्सव एप’ (Praveshotsav App) पर दर्ज किया जाएगा।
आइए जानते हैं शिक्षा विभाग के इस नए आदेश की मुख्य बातें और शिक्षकों के लिए इसके क्या मायने हैं:
1. प्रवेशोत्सव एप से होगा 100% डिजिटल सर्वे
इस बार के अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सर्वे का काम पूरी तरह से पेपरलेस (कागज रहित) होगा। शिक्षकों को घर-घर जाकर 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों (अनामांकित, ड्रॉप-आउट और प्रवेश योग्य) की पहचान करनी होगी और प्रत्येक परिवार की जानकारी सीधे ‘प्रवेशोत्सव एप’ में दर्ज करनी होगी। इससे पूरे राज्य का डेटा एक ही प्लेटफॉर्म पर रियल-टाइम में उपलब्ध हो सकेगा।
2. चार चरणों में चलेगा सघन अभियान
विभाग ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए इसे चार प्रमुख चरणों (विशेष सघन सर्वे दिवस) में बांटा है:
- प्रथम चरण: 27 मार्च
- द्वितीय चरण: 6 अप्रैल
- तृतीय चरण: 10 अप्रैल
- चतुर्थ चरण: 15 अप्रैल
3. रोटेशन के आधार पर लगेगी ड्यूटी
पीईईओ (PEEO) और यूसीईईओ (UCEEO) स्तर पर शिक्षकों को अलग-अलग वार्डों और मोहल्लों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। हर दिन केवल लगभग 25% शिक्षक ही फील्ड में जाकर डोर-टू-डोर सर्वे करेंगे। बाकी बचे शिक्षक विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से संचालित करेंगे।
निष्कर्ष: शिक्षा विभाग का यह तकनीकी कदम न केवल सर्वे को पारदर्शी बनाएगा बल्कि डेटा एंट्री के बोझ को भी सुव्यवस्थित करेगा। एक शिक्षक के नजरिए से ‘प्रवेशोत्सव एप’ का इस्तेमाल शुरुआत में थोड़ा नया लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह कागजी रजिस्टरों के झंझट से मुक्ति दिलाने वाला एक शानदार टूल साबित होगा।
आप सभी शिक्षक साथियों को नए सत्र और प्रवेशोत्सव अभियान की शुभकामनाएँ!